कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट के मार्गदर्शन में अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस (International Day of Sign Languages) के अवसर पर स्थानीय दिव्यांग पुनर्वास केंद्र, झाबुआ में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के छात्रावास में अध्ययनरत बालक-बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए सांकेतिक भाषा के माध्यम से विभिन्न प्रस्तुतियां दीं।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ डॉ. पाटीदार तथा पेरेन्ट्स सोसायटी फॉर पर्सन्स विद डिसेबिलिटी के जिला अध्यक्ष श्री यशवंत भंडारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा भगवान गणेश की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
खास बातें
- कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा भगवान गणेश की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
- बच्चों ने सांकेतिक भाषा के माध्यम से अपने विचारों एवं भावनाओं को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया।
- छात्र दिलीप भूरिया ने सांकेतिक भाषा में अतिथियों का स्वागत किया।
कार्यक्रम के दौरान छात्रावास में अध्ययनरत विशेष आवश्यकता वाले बालक-बालिकाओं ने सांकेतिक भाषा में स्वागत उद्बोधन, स्वागत गीत एवं प्रेरणादायक प्रस्तुतियां देकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। बच्चों ने सांकेतिक भाषा के माध्यम से अपने विचारों एवं भावनाओं को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया। छात्र दिलीप भूरिया ने सांकेतिक भाषा में अतिथियों का स्वागत किया।
डॉ. पाटीदार ने कहा कि सांकेतिक भाषा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए संवाद और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। बच्चों में श्रवण संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान तथा उचित उपचार से बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। समाज में सांकेतिक भाषा के प्रति समझ विकसित करना और इसका सम्मान करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
श्री यशवंत भंडारी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस समावेशी समाज के निर्माण का संदेश देता है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों में प्रतिभा और क्षमताओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता उन्हें उचित अवसर, मंच, मार्गदर्शन एवं सहयोग उपलब्ध कराने की है। उन्होंने बताया कि पेरेन्ट्स सोसायटी द्वारा बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
इस अवसर पर दिव्यांग पुनर्वास केंद्र के विशेषज्ञों द्वारा उपस्थित अभिभावकों एवं शिक्षकों को सांकेतिक भाषा के बुनियादी संकेतों की जानकारी एवं प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही बच्चों को सांकेतिक भाषा के महत्व, इतिहास एवं दैनिक जीवन में इसके उपयोग के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों द्वारा छात्रावास में निवासरत बालकों को इन-हाउस ड्रेस, बेडशीट एवं पिलो कवर भी वितरित किए गए। कार्यक्रम के अंत में छात्र महेन्द्र सिंगाड़ ने सांकेतिक भाषा के माध्यम से उपस्थित अतिथियों एवं सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में श्री अनिल बिसने, श्री विकास जोशी, श्री निखिल शर्मा, सुश्री जयश्री कहार, श्री अरुण महाकुड, श्री जीवन परमार, श्री जितेन्द्र रावत, श्री सुनील भूरिया, विशेष शिक्षक श्री अनिल वसुनिया सहित दिव्यांग पुनर्वास केंद्र का स्टाफ, अभिभावकगण एवं अन्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन छात्रावास अधीक्षक श्री शैलेन्द्र सिंह राठौर द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के समापन पर सभी ने सांकेतिक भाषा को बढ़ावा देने तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में सक्रिय सहभागिता का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन सांकेतिक भाषा में राष्ट्रगान की प्रस्तुति के साथ हुआ।


