कलेक्टर श्री राजीव रंजन मीना के निर्देशानुसार एवं जिला आयुष अधिकारी डॉ. प्रमिला चौहान के मार्गदर्शन में आयुर्वेद दिवस 2026 की थीम “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” के अंतर्गत शासकीय जिला आयुर्वेद चिकित्सालय, धार द्वारा शासकीय कन्या महाविद्यालय, धार में छात्राओं के लिए विशेष स्वास्थ्य एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की 114 छात्राओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य युवा वर्ग को आयुर्वेद, स्वस्थ जीवनशैली, महिला स्वास्थ्य, योग तथा सिकल सेल रोग के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम में शासकीय जिला आयुर्वेद चिकित्सालय, धार के विशेषज्ञ आयुर्वेद डॉ. अतुल तोमर ने आयुर्वेद की मूल अवधारणा तथा वर्तमान समय में आयुर्वेद की प्रासंगिकता पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद केवल रोग होने के बाद उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा तथा रोगी के रोग का शमन करने वाली समग्र स्वास्थ्य पद्धति है। उन्होंने वर्तमान जीवनशैली में अनियमित दिनचर्या, असंतुलित आहार, शारीरिक निष्क्रियता, तनाव, अपर्याप्त नींद तथा अत्यधिक डिजिटल निर्भरता के कारण उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं पर छात्राओं का ध्यान आकर्षित किया।

खास बातें

  • कार्यक्रम में डॉ. अतुल तोमर ने सिकल सेल रोग के प्रति विशेष जागरूकता प्रदान की।
  • महिलाओं में होने वाली रक्ताल्पता (एनीमिया) के कारणों, उससे होने वाली कमजोरी, थकान, चक्कर आदि लक्षणों तथा संतुलित एवं पोषणयुक्त आहार की आवश्यकता के बारे में जागरूक किया।
  • सुश्री नेहा बाजपेयी, योग प्रशिक्षक ने छात्राओं को महिलाओं एवं युवतियों के लिए उपयोगी योगासन एवं योग आधारित स्वास्थ्य अभ्यासों के बारे में जानकारी दी।

डॉ. अतुल तोमर ने इस वर्ष की थीम “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” को युवा पीढ़ी से जोड़ते हुए समझाया कि आज अपनाई जाने वाली जीवनशैली ही भविष्य के स्वास्थ्य की नींव तैयार करती है। उन्होंने छात्राओं को संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, योग, मानसिक संतुलन तथा प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने आयुर्वेद में बताए गए दिनचर्या, ऋतुचर्या, आहार-विहार और स्वास्थ्य संरक्षण के महत्व को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया।

सिकल सेल रोग के प्रति विशेष जागरूकता

कार्यक्रम में डॉ. अतुल तोमर ने सिकल सेल रोग के प्रति विशेष जागरूकता प्रदान की। उन्होंने छात्राओं को बताया कि सिकल सेल एक वंशानुगत रक्त संबंधी विकार है, जिसके प्रति समय रहते जागरूकता, जांच और उचित स्वास्थ्य सेवाओं से प्रभावित व्यक्तियों के जीवन की गुणवत्ता बेहतर करने में सहायता मिल सकती है।

उन्होंने छात्राओं को सिकल सेल के रोगी एवं वाहक (Carrier) के अंतर, परिवार में इसकी संभावित विरासत, स्क्रीनिंग के महत्व तथा विवाह एवं परिवार नियोजन के संदर्भ में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से आग्रह किया कि सिकल सेल को लेकर वैज्ञानिक जानकारी और समय पर जांच को महत्व दिया जाना चाहिए।

डॉ. तोमर ने यह भी समझाया कि सिकल सेल जैसी स्वास्थ्य समस्याओं में केवल औषधि ही नहीं, बल्कि नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, उचित आहार-विहार, चिकित्सकीय परामर्श, रोगी की नियमित निगरानी तथा परिवार एवं समाज का सहयोग भी महत्वपूर्ण है। छात्राओं को अपने परिवार एवं समुदाय में सिकल सेल के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया गया।

डॉ. भाग्यश्री नावड़े, आयुर्वेद मेडिकल ऑफिसर, शासकीय जिला आयुर्वेद चिकित्सालय धार ने विशेष रूप से महिला स्वास्थ्य, दिनचर्या, ऋतुचर्या एवं महिलाओं में एनीमिया विषय पर जानकारी दी।

उन्होंने छात्राओं को समझाया कि किशोरावस्था एवं युवावस्था में पौष्टिक आहार, पर्याप्त नींद, व्यक्तिगत स्वच्छता तथा नियमित दिनचर्या का विशेष महत्व है। महिलाओं में होने वाली रक्ताल्पता (एनीमिया) के कारणों, उससे होने वाली कमजोरी, थकान, चक्कर आदि लक्षणों तथा संतुलित एवं पोषणयुक्त आहार की आवश्यकता के बारे में जागरूक किया।

उन्होंने मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता, उचित आहार और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को छिपाने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने पर भी जोर दिया। साथ ही दिनचर्या एवं ऋतुचर्या को आधुनिक जीवनशैली के साथ व्यावहारिक रूप से अपनाने के तरीके बताए।

सुश्री नेहा बाजपेयी, योग प्रशिक्षक ने छात्राओं को महिलाओं एवं युवतियों के लिए उपयोगी योगासन एवं योग आधारित स्वास्थ्य अभ्यासों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने नियमित योग के माध्यम से शारीरिक सक्रियता, लचीलापन, मानसिक शांति एवं स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के महत्व को समझाया तथा छात्राओं को योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।

छात्राओं ने लिया आयुर्वेद का संकल्प

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित छात्राओं एवं प्रतिभागियों को आयुर्वेद प्रतिज्ञा भी दिलाई गई। छात्राओं ने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, आयुर्वेद की वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्यवर्धक अवधारणाओं को समझने तथा अपने परिवार और समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया।

महाविद्यालय प्रबंधन एवं प्राध्यापकों की उपस्थिति

कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. सुशील फड़के का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। प्रोफेसर डॉ. कुसुम बोरासी कार्यक्रम की प्रभारी के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर डॉ. नरेंद्र तिवारी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में प्रोफेसर डॉ. कोमल भाटिया, प्रोफेसर डॉ. रेखा स्वाले, प्रोफेसर डॉ. दीपा बघेल एवं प्रोफेसर डॉ. जयश्री कनूजे की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के अंत में प्रोफेसर डॉ. सुनीता मुजालदे द्वारा आभार व्यक्त किया गया।